नृत्य-आँगना

सन 1975, घर में केवल एक विवाहित जोड़ी.
सुबह घर में दहाड़ सुनाई दी.. अरे सुनते हो, कहाँ छुप गए हो चूहे की तरह!
यह दहाड़ ‘नृत्य’ नामक महिला की थी.
आवाज़ सुनते ही पति दौड़ा आया, बोला- क्या हुआ भागवान, सुबह सुबह मुझे चूहा क्यूँ कह रही हो, मेरा नाम ‘आंगन’ है.
”अरे, तुम्हारा नाम लेने लायक नहीं है,” नृत्य ने कहा.
”तो तुम्हारा नाम कौन सा घर में सजाने लायक है”, आंगन बोला.
नृत्य- चलो छोड़ो, जाओ ये गेहूं पिसाकर लाओ.
आंगन- इन गेहुओं को आपने दांतों के बीच क्यूँ नहीं रख लेती, पीसती रहती हो हमेशा.
नृत्य- अब बक बक मत करो, वरना रोटी नहीं मिलेगी.
आंगन- मुझे रोटी मिले न मिले, तुम रोती जरूर मिलोगी.
आंगन गेहूं पिसाने गया.
चक्की वाला बोला- क्यों मियां, बीवी की खरी खोटी सुन कर आ रहे हो.
आंगन- अरे भाई, उसकी ज़ुबान तुम्हारी चक्की से भी तेज है. क्या करूं.
चक्की वाला- मेरी मानो, ये रोज की झिक झिक खत्म करो, तलाक लो और सुकून से जियो.
आंगन आटा लेकर घर आ आया. नृत्य रोती मिली.
नृत्य- क्यों जी, गेंहू पिसाने गए थे या तलाक के पेपर बनवाने! जब से शादी हुई है, तलाक के बारे में सोचते रहते हो.
आंगन- ये कैसे कह सकती हो तुम?
नृत्य- कामवाली ने बताया.
आंगन- अरी उसकी बात पे तुम विश्वास करती हो, अपने पति पर नहीं है भरोसा? कामवाली तो खुद परित्यक्ता है.
नृत्य- चलो छोड़ो.
अगले दिन कामवाली ने मोहल्ले में बात फैला दी की नृत्य और आंगन में तलाक होने वाला है.
यह सुनते ही प्रत्येक दिन कोई न कोई पड़ोसीन आ जाती नृत्य को समझाने.
पड़ोसिन- क्यों री निति, मैं ये क्या सुन रही हूँ.
नृत्य रो रो कर- अरी बहन मैं क्या करूं वो तो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते.
पड़ोसिन- कहो तो मैं सभी महिलाओं से कहकर नारी-शक्ति-संघ से तुम्हारे पति पर केस करवाउं.
नृत्य- नहीं बहन, मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो.
अगले दिन, यह बात आं

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गन के ऑफिस में फ़ैल गयी. ऑफिस हेड ने आंगन को नौकरी से निकल देने की धमकी दी.
आंगन घर आया और उदास बैठा रहा.
नृत्य- आ गए, कहाँ है तलाक के पेपर?
आंगन- तुम भी हद करती हो भागवान. आव देखा न ताव, सब जगह मेरी बुराई ही करती गयी. तुम्हारी वजह से मेरी नौकरी चली जाती आज.
नृत्य- हाय राम! ये क्या हो गया!? मुझे माफ करदो जी. आगे कभी तुम्हारी बुराई नहीं करूंगी.
अगले दिन..
नृत्य- अरे सुनते हो, कहाँ छुप गए हो गीदड़ की तरह!
आंगन- हे देवी, मुझे चूहा हो रहने दो.
बस तभी से है- नृत्य न जाने आंगन टेढ़ा.

Author: आकाश

मै तो सर्वप्रथम एक भारतीय और छत्तीसगढ़ प्रदेश का निवासी हूँ। विवाहित और हंसमुख परन्तु एकान्तप्रिय व्यक्ति हूँ। थोड़ा क्रोधी होना मेरा अवगुण है। परन्तु स्वप्नशील, अभिलाषी भी हूँ।